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Mrit Sanjeevani Vati

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Rs. 750.00
मृत संजवानी वती वीर्य वाहिनी नाड़ी, वात वाहिनी नाड़ी, किडनी और मूत्र संस्थान पर सबसे ज्यादा असर करती है और इनमे होने वाले रोगो को दूर करती है, इसके इस्तेमाल से वीर्यस्राव या घाट गिरने की समस्या भी कम होती है, पेशाब के पहले या बाद वीर्य निकल जाने में...
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मृत संजवानी वती वीर्य वाहिनी नाड़ी, वात वाहिनी नाड़ी, किडनी और मूत्र संस्थान पर सबसे ज्यादा असर करती है और इनमे होने वाले रोगो को दूर करती है, इसके इस्तेमाल से वीर्यस्राव या घाट गिरने की समस्या भी कम होती है, पेशाब के पहले या बाद वीर्य निकल जाने में लाभ होता है और हर तरह का प्रमेह को दूर करती है, नौजवानो की बहुत ही कॉमन बीमारी स्वपनदोष चाहे कैसा भी हो, वातज पित्तज या कफज इसके इस्तेमाल से दूर होता है यह वीर्य दोष को दूर कर वीर्य को गाढ़ा बनाती है, शीघ्रपतन और जल्द डिस्चार्ज होने जैसी प्रॉब्लम में भी इस से फायदा होता है।

समस्या

मृत-संजीवनी वटी के प्रयोग से पेशाब की जलन, पत्थरी और पेशाब के इन्फेक्शन में फ़ायदा होता है, यह खून की कमी को दूर करती है, मसल्स को ताक़त देती है और पाचन शक्ति ठीक कर भूख बढ़ाने में मदद करती है, इसके इस्तेमाल से मानसिक शक्ति बढ़ती है और अच्छी नींद लाने में मदद करती है यह वटी वात–पित्त–कफ त्रिदोष से उत्पन्न सभी प्रकार के रोगों का नाश करती है। इसके साथ-साथ मृत-संजीवनी वटी ज्वर, निमोनियां, सर्दी, जुकाम खांसी, कफ, श्वांस, फेफड़ों के रोग, राजयक्ष्मा, उर:क्षत, नाडी क्षीणता, शीतांग, आदि रोगों में भी इस औषध का सफल प्रयोग होता है. शरीर में किसी भी कारण वश खून की कमी हो जाए तो इसके सेवन से अमृत के समान लाभ होता है. बालक, वृद्ध, युवा, स्त्री, पुरुष सबके लिए समान रूप से लाभकारी है. शीतकाल में इसका निरंतर सेवन किया जा सकता है !

लाभ

मृत-संजीवनी वटी वीर्य वाहिनी नाड़ी, वात वाहिनी नाड़ी, किडनी और मूत्र संस्थान पर सबसे ज़्यादा असर करती है और इनमे होने वाले रोगों को दूर करती है, इसके इस्तेमाल से वीर्यस्राव या धात गिरने की प्रॉब्लम कम होती है, पेशाब के पहले या बाद वीर्य निकल जाने में लाभ होता है और हर तरह के प्रमेह को दूर करती है, नौजवानों की बहुत ही कॉमन बीमारी स्वप्नदोष चाहे कैसा भी हो, वातज, पित्तज या कफज इसके इस्तेमाल से दूर होता है. यह वीर्य दोष को दूर कर वीर्य को गाढ़ा बनाती है, शीघ्रपतन और जल्द डिस्चार्ज होने जैसी प्रॉब्लम में भी इस से फ़ायदा होता है !

मात्रा

1 टेबलेट रोज़ाना सुबह शाम खाना खाने के बाद गर्म दूध में शक्कर मिलाकर या मधु (शहद), मक्खन-मिश्री या मलाई-मिश्री के साथ !

परहेज़

ज्यादा तले, खटाई वाले व मिर्च-मसालेदार पदार्थ न खाएं !

आयु वर्ग

इस दवा को 12 से लेकर 90 वर्ष तक की आयु में कोई भी स्त्री-पुरुष ले सकते हैं !

 

ध्यान दे

हमारी समस्त दवाएं अपने प्रभाव और परिणाम से आयुर्वेद की कसोटियों पे परिपूर्ण हैं, जिनके नियमित व उचित मात्रा में उपयोग से शरीर में किसी प्रकार का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है ! दवा के इस्तेमाल से पहले उसके सेवन कि विधि, मात्र और परहेज़ एक बार ध्यान से पढ़ लें !

 

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